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hindi kavita bochharen

Posted On: 23 Sep, 2013 Others में

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कविता
ठण्डी ठण्डी बौछारें
जग मोहन ठाकन
—————————–
भादों की तपती उमस में ,
सावन का एहसास दिलायें ।
फुहार बरसती बौछारें,
ये ठण्डी ठण्डी बोछारें ।।
उदास हुए ये गुवार के पत्ते
मूंह लटकाये बाजर सिरटी ।
बौछारों की इक छुअन से
खिल खिल जाये खेत की मिटटी।
ऐसा सहलायें बौछारे ,
ये ठण्डी ठण्डी बौछारें ।।
रातों भेजे इनको न्यौता
आस लगाये तपता यौवन ।
दुगुने वेग से अगन बढायें
सौतन बन ये बौछारें ।
मरज्याणी ये बौछारें ,
ये ठण्डी ठण्डी बौछारें ।।
किसे निहारूं , किसे पुकारूं
सोचण दें ना बौछारें।
फुहार बरसती बौछारें
ये ठण्डी ठण्डी बौछारें ।।
जग मोहन ठाकन



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Raj Bahadur के द्वारा
September 23, 2013

सुन्दर पंक्तिया आभार

October 14, 2013

किसे निहारूं , किसे पुकारूं सोचण दें ना बौछारें। फुहार बरसती बौछारें ये ठण्डी ठण्डी बौछारें बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .


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